“FORWARDED”

बड़ी अच्छी सुबह है आज। हल्की धूप है,और ठंड के ये शुरुआती दिनों कि ना बात ही कुछ और होती है। गुलाबी ठंड का एहसास किसे पसंद नहीं आता होगा भला। पर हाँ आधे से ज्यादा वक्त तो पंखे की सेटिंग पर ही निकल जाता है। पंखा चल रहा हो तो ठंड, बंद रखो तो गर्मी। सोने जाते वक्त भले ही चार नंबर पर पंखे कि सेटिंग कर दो, पर आधी रात में उठ कर तीन फिर दो और फिर फाईनली पंखा बंद करके ही सोना पड़ता है। भई! सोना क्या पड़ता है, तब तक नींद ही कहाँ बाकी रहती है। उस वक्त तो ये खुशनुमा ठंड जी का जंजाल बन जाती है।
” इस बार दीपावली पर ही ठंड ने दस्तक दे दी है।” चाय के घूंट के साथ इस ख़याल ने मन में एंट्री की। फिर क्या मन को दीपावली की तैयारियों की सोच में मैंने उलझा दिया। तभी मेरे फोन ने इशारा किया,” किसी का मैसेज है, देख लो जरा। ” मैंने भी झट से फोन लेकर चेक कर ही लिया। अरे नहीं कुछ खास तो नहीं था, बस किसी ने, किसी और से प्राप्त ज्ञान मुझे फॉरवर्ड कर दिया था।
हाँ वो आजकल वाह्ट्सैप वाले बता देते हैं ना कि मैसेज किसी ने खुद भेजा है या किसी और का आपको सरका दिया गया है। मैसेज के साथ फॉरवार्डेड लिखा जो होता है। वैसे कौन सा हमें ये पता नहीं था, जैसे कि क्या हमें पता नहीं होता कि दीपावली पर सब शुभचिन्तकों के यहाँ से आये सोहनपापड़ी के डब्बे फॉरवार्डेड होतें हैं।
कितने डब्बे तो बेचारे सालों भटकते रहतें हैं, इस घर से उस घर। अंदर बंद पड़ी सोहनपापड़ी तो कब का इंतजार में हारकर दम तोड़ चुकी होती है,कि कोई तो एक दिन खोल कर उसे चखने कि कोशिश करेगा, पर बस बेचारा डब्बा दर दर भटकता रहता है, “हैप्पी दिवाली” की शुभकामना और हर बार एक नये मुस्कान के साथ। वाह्ट्सैप के फॉरवार्डेड मैसेज की तरह बेचारा सालों फॉरवार्ड होता रहता है। उसे तो याद भी नहीं होगा कि आखिर उसे खरीदा किसने था। लोग ये हाल करने वाले हैं, ये बात पता जो होती उसे तो पक्का वह दुकान से निकलता ही नहीं ,वहीं किसी कोने में आराम कर रहा होता।
वैसे ये फॉरवार्डेड की प्रथा तो कोई नयी बात नहीं है।हम सब अकसर यही तो करते हैं। क्यूँ शादी, त्योहार पर रिश्तेदारों से मिलने वाले उन नापसंद कपड़ों और गिफ्ट्स को भूल गये क्या। वो सब भी तो बेचारे फॉरवार्डेड होते रहते हैं। मिलते ही उन सब की किस्मत लिख दी जाती है। “ये फलाना चाचाजी या मामाजी की बेटी की शादी पर दे देंगे। वो भूरे रंग वाला, बड़ा ही बेकार सा है, अगले महीने शर्मा जी के बेटे के जनेऊ पर चला देंगे। ”
खैर शादियों का सीजन तो नहीं पर सोहनपापड़ी का त्योहार, मेरा मतलब है कि दीपावली का त्योहार आ रहा है। सबके सोहनपापड़ी के डब्बे सैर पर निकलने के लिये तैयार हो ही गये होंगे। ?

3 thoughts on ““FORWARDED”

  • जिंदगी की वास्तविकता को बहुत अच्छी तरह से शब्दों में पिरोया है आपने ??

  • gamefly free trial

    all the time i used to read smaller content that as well clear their motive, and that is also happening with this article which I am reading at this place.

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